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जॉब मार्केट 2017: के पहले छह महीने में जॉब मार्केट की दशा और दिशा क्या होगी?ए

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इस बात को लेकर सभी कंफ्यूज हैं कि नोटबंदी का जॉब मार्केट पर क्या असर होगा? 2017 के पहले छह महीने में जॉब मार्केट की दशा और दिशा क्या होगी? आईटी, फार्मा, ऑटो, ई-कॉमर्स, टेलीकॉम जैसे तमाम सेक्टर्स में कितनी नौकरियां निकलेंगी? अंग्रेज़ी दैनिक ‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित समाचार के अनुसार फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर्स में बड़ी तादाद में नौकरियां निकल सकती हैं जबकि आईटी सेक्टर्स में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक ई-कॉमर्स में छोटी और मध्यम आकार की कंपनियां अच्छी वृद्धि कर सकती हैं और वहां बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक नौकरियां देखने को मिलेंगी.

ई-कॉमर्स
एक्सपर्ट्स के मुताबिक जुलाई-अक्टूबर 2016 के दौरान फेस्टिवल सीजन होने के चलते ई-कॉमर्स कंपनियों में बड़ी संख्या में भर्तियां निकली थीं. लेकिन साल के अंत में और नोटबंदी के चलते इस परिदृश्य में थोड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है. हालांकि प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी, फ्रंटलाइन और एनालिटिक्स के रोल से जुड़ी जॉब्स निकलती रहेंगी.

मैन्यूफैक्चरिंग व ऑटो
नोटबंदी ने मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है, खासतौर पर ऑटो इंडस्ट्री को. ग्रामीण इलाकों में भारी मशीनरी की ब्रिक्री में गिरावट आई है. बैंकिग सिस्टम में और अधिक कैश आने से हालात सुधरेंगे. यहां वृद्धि और नियुक्तियों की गति धीमी रह सकती है। मैन्यूफैक्चरिंग व ऑटो कंपनियां नोटबंदी के बाद सतर्क होकर कदम बढ़ाएंगी.

आईटी/आईटीईएस
आईटी कंपनियां डाटा साइंसेज, एल्गोरिथम डिजाइन और क्लाउड कंप्यूटिंग से जुड़े ऑपरेशंस का विस्तार कर सकती है. द टीमलीज इंप्लॉएमेंट आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2016 से मार्च 2017 के बीच छह महीनों के दौरान थोड़ी वृद्धि (पिछले छह महीनों की तुलना में) देखने को मिलेगी. वहीं ऑटोमेशन के चलते टेस्टिंग से जुड़ी नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है.

फार्मा
केपीएमजी की रिपोर्ट फार्मास्यूटिकल्स के मुताबिक देश की फार्मा मार्केट अगले तीन सालों में 12 फीसदी सीएजीआर की गति से आगे बढ़ेगी. 2020 तक भारत दुनिया की टॉप तीन फार्मास्यूटिकल्स मार्केट में से होगा. इस सेक्टर में सेल्स और प्रोडक्ट स्पेशलिस्ट से जुड़ी नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे. भारतीय बाजार के लिए उच्च स्किल्ड आर एंड डी व इनोवेशन प्रोफेशनल्स की जरूरत अभी भी चुनौतियां बनी रहेंगी.

टेलीकॉम
एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस सेक्टर में 4G और फाइबराइजेशन के जरिए नेटवर्क के विस्तार में कई अवसर पैदा होंगे. डिजिटल टेक्नोलॉजी और मोबाइल एप्प डेवलपमेंट के क्षेत्र और मजबूत होंगे. यहां तेजी के साथ भर्तियां निकल सकती हैं. डिजिटल इंडिया कैंपेन कई अवसर खोल सकता है.

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