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नोटबंदी से चुनाव और महंगा होगा बीते चुनाव के मुकाबले दस फीसद ज्यादा होगा खर्च

27_12_2016-black-money-350




लखनऊ (जेएनएन)। एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफाम्र्स (एडीआर) के इलेक्शन वॉच ने दावा किया है कि नोटबंदी आने वाले विधानसभा चुनाव में कालेधन का प्रवाह नहीं रोक सकेगी। बल्कि, नोटबंदी से चुनाव और महंगा होगा। संभावित प्रत्याशियों और पार्टी पदाधिकारियों में 69 फीसद का कहना है कि नोटबंदी से चुनाव प्रचार पर असर नहीं पड़ेगा। यूपी, इलेक्शन वॉच के मुख्य संयोजक संजय सिंह ने सोमवार को प्रेसक्लब में एडीआर की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पत्रकारों को यह जानकारी दी। संजय के मुताबिक नोटबंदी के बावजूद बीते चुनाव के मुकाबले इस बार 10 फीसद ज्यादा धन खर्च होगा। ज्यादातर उम्मीदवार चुनाव जीतने के लिए पुराने तरीकों का सहारा लेंगे। यानी पैसा पानी की तरह बहाएंगे। हालांकि सर्वे में शामिल 80 फीसद आम लोगों का मानना है कि नोटबंदी के चलते चुनाव प्रचार में कठिनाई होगी। चुनाव में कारोबार करने वालों में 60 फीसद मानते हैं कि उनके कारोबार पर कोई असर नहीं होगा जबकि 30 फीसद का कहना है कि थोड़ा-बहुत असर होगा। सर्वे में यह बात भी आयी कि एक लाख रुपये के नोटों के लिए प्रत्याशी को 25 हजार अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं।

संजय सिंह ने बताया कि नोटबंदी के बाद कालेधन पर अंकुश और चुनाव सुधार के लिए उन्होंने 10 मंडलों झांसी, बांदा, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, बनारस, गोरखपुर, इलाहाबाद, आगरा और बरेली की तीस विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों, पार्टी पदाधिकारियों, कारोबारियों और आमजन के बीच रुझान का पता किया। हर विधानसभा क्षेत्र में दस संभावित उम्मीदवार समेत 300 लोग चुने गये। कुल नौ हजार लोगों सर्वे किया गया।

सर्वे के अनुसार पहले की अपेक्षा धर्म और जाति का प्रभाव बढ़ेगा। अभी से उम्मीदवारों ने जनवरी और फरवरी माह में विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के जरिये भागवत भंडारे आयोजित कर दिए हैं। इसके लिए आयोग से अनुमति की भी जरूरत नहीं होगी। भंडारे में लोगों को भोज दिए जाएंगे और उसमें उम्मीदवार की भी मौजूदगी रहेगी। मुस्लिम कम्युनिटी के बीच भी इस तरह के आयोजन होंगे।

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